चित्रित समाज: हिंदी साहित्य में कार्टून और व्यंग्य की भूमिका
Keywords:
कार्टून, व्यंग्य, हिंदी साहित्य, सामाजिक चेतना, हास्य, आलोचना, मीडिया, समकालीनता, चित्रकला, जनमतAbstract
यह शोधपत्र हिंदी साहित्य में कार्टून और व्यंग्य की भूमिका का विश्लेषण करता है। 2015 से 2024 के बीच प्रकाशित प्रमुख साहित्यिक रचनाओं, पत्रिकाओं और समाचार पत्रों के संदर्भ में यह अध्ययन करता है कि किस प्रकार कार्टून और व्यंग्यात्मक रचनाएँ समाज की विसंगतियों, राजनीतिक भ्रष्टाचार, सामाजिक पाखंड, और सांस्कृतिक बदलावों को चुटीले, रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं। यह शोध बताता है कि कार्टून और व्यंग्य न केवल हास्य का माध्यम हैं, बल्कि सामाजिक चेतना, जनमत निर्माण और आलोचनात्मक सोच को भी प्रोत्साहित करते हैं।
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