अंधेरी गलियों का सफर: हिंदी साहित्य में हाशिए के चरित्र और संकट
Keywords:
हाशिए के चरित्र, हिंदी साहित्य, सामाजिक संकट, दलित विमर्श, स्त्री विमर्श, अस्मिता, संघर्ष, अल्पसंख्यक, प्रतिरोध, समकालीनताAbstract
यह शोधपत्र आधुनिक हिंदी साहित्य में हाशिए पर पड़े चरित्रों और उनके जीवन-संघर्ष, संकट एवं सामाजिक हाशिएकरण का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है। 2010 से 2024 के बीच प्रकाशित कहानियों, उपन्यासों और कविता संग्रहों के संदर्भ में यह विश्लेषण करता है कि किस प्रकार दलित, महिला, आदिवासी, अल्पसंख्यक, किन्नर, मज़दूर आदि वर्गों के अनुभव, अस्मिता की तलाश, सामाजिक अन्याय, और प्रतिरोध की प्रवृत्तियाँ हिंदी साहित्य में उभरकर सामने आई हैं। यह शोध बताता है कि ‘अंधेरी गलियों’ में फँसे ये चरित्र अपने अस्तित्व, अधिकार और सम्मान के लिए निरंतर संघर्षरत हैं।
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