हिन्दी भाषा के विकास में भारतेन्दुयुगीन पत्रकारिता का योगदान
Keywords:
नवजागरण, भाषा विकास, राष्ट्रीय चेतना, देवनागरी लिपि, हिन्दी पत्रिकाएँ, भाषा मानकीकरण, जनचेतना, भाषायी अस्मिता।Abstract
उन्नीसवीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध हिन्दी भाषा और साहित्य के इतिहास में नवजागरण का काल माना जाता है। इसी समय हिन्दी भाषा को सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राष्ट्रीय अभिव्यक्ति का प्रभावी माध्यम बनाने के उद्देश्य से अनेक साहित्यकारों और पत्रकारों ने संगठित प्रयास किए। इस युग के अग्रदूत भारतेन्दु हरिश्चन्द्र तथा उनके समकालीन साहित्यकारों ने पत्र-पत्रिकाओं को हिन्दी के प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम बनाया।भारतेन्दुयुगीन पत्रिकाओं ने भारतीय समाज में व्याप्त सामाजिक विषमताओं, आर्थिक शोषण, सांस्कृतिक हीनभावना तथा औपनिवेशिक नीतियों के विरुद्ध जनमत तैयार किया। साथ ही इन पत्रिकाओं ने हिन्दी को राष्ट्र की साझा भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए निरन्तर वैचारिक अभियान चलाया। कविवचन सुधा, हरिश्चन्द्र मैगजीन, हरिश्चन्द्र चन्द्रिका, हिन्दी प्रदीप, सारसुधानिधि तथा उचित वक्ता जैसी पत्रिकाओं ने भाषा के परिष्कार, देवनागरी लिपि के प्रचार, स्वदेशी भावना के प्रसार तथा राष्ट्रीय चेतना के विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
References
डॉ० वंशीधर, भारतेन्दु युगीन हिन्दी पत्रकारिता, पृ050
वही, पृ049
वही, पृ0138
वही, पृ0138
वही, पृ0138
रामविलास शर्मा, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र और हिंदी नवजागरण की समस्याएँ, पृ095
वही, पृ095 8. डॉ० वंशीधर, भारतेन्दु युगीन हिंदी पत्रकारिता
वही, पृ0141
डॉ० रामविलास शर्मा, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र और हिंदी नवजागरण की समस्याएं, पृ0101
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